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जुलाई 02, 2012

काफ़िर


कभी नेकी भी उसके जी में आ जाये है मुझ से 
जफ़ायें करके अपनी याद शर्मा जाये है मुझ से,

ख़ुदाया! ज़ज़्बा-ए-दिल की मगर तासीर उलटी है 
कि जितना खींचता हूँ और खिंचता जाये है मुझ से, 

वो बद-ख़ू (बदमिजाज़), और मेरी दास्तान-ए-इश्क़ तूलानी (लम्बी) 
इबारत मुख़्तसर (छोटी), क़ासिद (डाकिया) भी घबरा जाये है मुझ से,

उधर वो बदगुमानी है, इधर ये नातवानी (कमजोरी) है 
ना पूछा जाये है उससे, न बोला जाये है मुझ से, 

सँभलने दे मुझे ऐ नाउम्मीदी, क्या क़यामत है 
कि दामन-ए-ख़याल-ए-यार छूटा जाये है मुझ से, 

तकल्लुफ़ बर-तरफ़ (साफगोई), नज़्ज़ारगी (देखने) में भी सही, लेकिन 
वो देखा जाये, कब ये ज़ुल्म देखा जाये है मुझ से 

हुए हैं पाँव ही पहले नवर्द-ए-इश्क़ (इश्क की जुंग) में ज़ख़्मी 
न भागा जाये है मुझसे, न ठहरा जाये है मुझ से,

क़यामत है कि होवे मुद्दई (दुश्मन) का हमसफ़र "ग़ालिब"
वो काफ़िर, जो ख़ुदा को भी न सौंपा जाये है मुझ से

जून 11, 2012

असर


आह को चाहिए एक उम्र असर होने तक
कौन जीता है तॆरी ज़ुल्फ के सर (सुलझने) होने तक,

दाम हर मौज में है हल्का-ए-सदकामे-नहंग (लहरों में मगरमच्छ)
देखे क्या गुजरती है कतरे पे गुहर (मुसीबत) होने तक,

आशिकी सब्र तलब (धैर्य) और तमन्ना बेताब‌
दिल का क्या रंग करूं खून‍-ए-जिगर होने तक,

हमने माना कि तगाफुल (उपेक्षा) ना करोगे लेकिन‌
ख़ाक हो जाएँगे हम तुमको खबर होने तक,

परतवे-खुर (सूरज) से है शबनम को फ़ना की तालीम 
में भी हूँ एक इनायत की नज़र होने तक,

यक-नज़र बेश (एक नज़र काफी) नहीं, फुर्सते-हस्ती गाफिल 
गर्मी-ए-बज्म (,महफ़िल की गर्मी) है इक रक्स-ए-शरर (अंगारों का नाच) होने तक,

गम-ए-हस्ती (जिंदगी के गम) का "असद" कैसे हो जुज-मर्ग-(मौत के सिवा) इलाज
शमा हर रंग में जलती है सहर होने तक, 


मई 25, 2012

कब वो सुनता है कहानी मेरी



कब वो सुनता है कहानी मेरी
और फिर वो भी ज़बानी मेरी,

ख़लिशे-ग़म्ज़-ए-खूँरेज़ (तंज की चुभन) न पूछ
देख ख़ूनाबा-फ़िशानी (खून के आँसू) मेरी,

क्या बयाँ करके मेरा रोएँगे यार
मगर आशुफ़्ता-बयानी (बकवास) मेरी,

हूँ ज़िख़ुद-रफ़्ताए-बैदा-ए-ख़याल(ख्यालों में खोया)
भूल जाना है निशानी मेरी,

मुत्तक़ाबिल (डरपोक) है मुक़ाबिल (दुश्मन) मेरा
रुक गया देख रवानी मेरी,

क़द्रे-संगे-सरे-रह (रास्ते का पत्थर) रखता हूँ
सख़्त-अर्ज़ाँ (मामूली) है गिरानी (शख्सियत) मेरी,

गर्द-बाद-ए-रहे-बेताबी (सड़क की आँधी) हूँ
सरसरे-शौक़ (जोश) है बानी (खूबी) मेरी,

दहन (मुँह) उसका जो न मालूम हुआ
खुल गयी हेच-मदानी (बेवकूफी) मेरी,

कर दिया ज़ओफ़ (बीमारी) ने आज़िज़ "ग़ालिब"
नंग-ए-पीरी (बुढ़ापे से भी बुरी) है जवानी मेरी,

मई 10, 2012

वो दिल नहीं रहा



अर्ज़-ए-नियाज़-ए-इश्क़ (प्यार के इज़हार) के क़ाबिल नहीं रहा 
जिस दिल पे नाज़ था मुझे, वो दिल नहीं रहा 

जाता हूँ दाग़-ए-हसरत-ए-हस्ती(जिंदगी के ज़ख्म) लिये हुए 
हूँ शमआ़-ए-कुश्ता(बुझी हुई शमा) दरख़ुर-ए-महफ़िल(महफिल के काबिल) नहीं रहा 

मरने की ऐ दिल और ही तदबीर कर कि मैं 
शायाने-दस्त-ओ-खंजर-ए-कातिल (कातिल का बाज़ू खंजर चलाने के काबिल) नहीं रहा

बर-रू-ए-शश जिहत (ज़मीं और आसमां) दर-ए-आईनाबाज़ (आस-पास) है 
यां इम्तियाज़-ए-नाकिस-ओ-क़ामिल (अधूरे और पूरे का भेद)  नहीं रहा

वा (खोल) कर दिये हैं शौक़ ने बन्द-ए-नक़ाब-ए-हुस्न (हुस्न से नकाब का खुलना) 
ग़ैर अज़ निगाह अब कोई हाइल (रूकावट) नहीं रहा 

गो मैं रहा रहीन-ए-सितम-हाए-रोज़गार (बेरोजगार) 
लेकिन तेरे ख़याल से ग़ाफ़िल (अनजान) नहीं रहा 

दिल से हवा-ए-किश्त-ए-वफ़ा (वफ़ा की आस) मिट गया कि वां (यूँ)
हासिल सिवाये हसरत-ए-हासिल (पाने की हसरत) नहीं रहा 

बेदाद-ए-इश्क़ (इश्क के ज़ुल्म) से नहीं डरता मगर 'असद' 
जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा


अप्रैल 18, 2012

मेरे दर्द की दवा करे कोई


इब्ने-मरियम (ईसा मसीह) हुआ करे कोई 
मेरे दर्द की दवा करे कोई, 

शरअ-ओ-आईन (पाक दर)पर मदार (इन्साफ) सही 
ऐसे क़ातिल का क्या करे कोई,

चाल, जैसे कड़ी कमाँ का तीर 
दिल में ऐसे के जा (जगह) करे कोई,

बात पर वाँ ज़बान कटती है
वो कहें और सुना करे कोई,

बक रहा हूँ जुनूँ में क्या-क्या कुछ
कुछ न समझे ख़ुदा करे कोई,

न सुनो गर बुरा कहे कोई
न कहो गर बुरा करे कोई,

रोक लो, गर ग़लत चले कोई
बख़्श दो गर ख़ता करे कोई,

कौन है जो नहीं है हाजतमंद (ज़रूरतमंद)
किसकी हाजत (ज़रूरत) रवा (पूरी) करे कोई 

क्या किया ख़िज्र** ने सिकंदर से 
अब किसे रहनुमा करे कोई, 

जब उम्मीद ही उठ गयी "ग़ालिब" 
क्यों किसी का गिला करे कोई,
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** ख़िज्र सिकंदर का नौकर था और उसने सिकंदर को धोखा दिया था |